महिला दिवस 2020: परिवार से लेकर समाज तक चुनौतियां तमाम, फिर भी बनाई पहचान
अमर उजाला के अपराजिता अभियान के तहत अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को संवाद एवं सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न क्षेत्रों में पहचान बनाने वाली महिलाओं ने परिवार एवं समाज की चुनौतियों पर प्रकाश डाला।

पटेल निगर स्थित अमर उजाला कार्यालय में हुए कार्यक्रम में महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि महिलाओं पर पुरुषों की तुलना में खुद को साबित करने का दबाव ज्यादा होता है। आज महिलाएं पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, मौलिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई ही नहीं लड़ रही है, बल्कि संगीत एवं म्यूजिक बैंड की दुनिया में मुकाम हासिल कर पुरुष एकाधिकार वाले पेशे पर समाज की मानसिकता भी बदल रही हैं।

कई महिलाओं ने बेबाकी से कहा कि महिलाओं को अधिकारों से वंचित रखने में सिर्फ समाज को ही कसूरवार नहीं ठहराया जा सकता है। बल्कि, इसके लिए परिवार भी दोषी होता है। क्योंकि, शुरुआत तो परिवार से होती है। कई महिलाएं कुछ करना चाहती हैं तो सबसे पहले उसके सामने अपने परिवार को मनाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। माता-पिता ही सवाल करने लगते हैं कि पता नहीं वह बाहर निकलकर कुछ कर पाएगी या नहीं, समाज वाले क्या-कुछ कहेंगे।

महिलाओं ने कहा कि अगर परिवार वाले समाज की चिंता छोड़कर बेटियों के सपनों को पंख लगाने को आगे आएं तो समाज खुद चुप हो जाएगा। अभिभावकों को बेटों की तरह ही बेटियों को भी स्वतंत्रता व आगे बढ़ने को मौका देना चाहिए। महिलाओं को भी निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी होगी। आज महिलाओं ने तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए हर क्षेत्र में खुद को साबित किया है। उत्तराखंड की महिलाओं को मातृशक्ति का सबसे उपयुक्त उदाहरण कहा जा सकता है।