गुजरात से एंटी हेलनेट, पड़ोसी राज्य से मंगवाए 20 हजार मधुमक्खियों के डिब्बे
हिमाचल सरकार सेब पेड़ों में परागण को पड़ोसी राज्यों से मधुमक्खियों के डिब्बे मंगवाने के साथ गुजरात से एंटी हेलनेट का प्रबंध कर रही है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में खुले बाजार और उचित मूल्य की दुकानों में चावल, गेहूं, आटा, दालों, तेल और चीनी जैसी आवश्यक खाद्य वस्तुओं का पर्याप्त भंडारण है। वह सोमवार को शिमला में कोविड-19 वायरस के संक्रमण के कारण प्रदेश में लगाए गए कर्फ्यू के दौरान आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए किए जा रहे प्रबंधों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
 

उन्होंने अधिकारियों को मध्यप्रदेश और तेलंगाना सहित अन्य राज्यों से दालों की आपूर्ति का प्रबंध करने के निर्देश दिए। कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से आग्रह किया है कि प्रदेश के लिए आवश्यक खाद्य सामग्री लेकर आने वाले ट्रकों के चालकों की सुविधा को राष्ट्रीय उच्च मार्गों पर कुछ ढाबे खोलने की अनुमति दी जाए। अधिकारी थोक और परचून विक्रेताओं के साथ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के भंडारों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावी तरीके से सुनिश्चित करें।

बागवानी विभाग को निर्देश दिए कि बागवानों और किसानों तक कीटनाशकों, फफूंदनाशकों की सुचारु आपूर्ति करने को कहा। सभी प्रकार की पौध संरक्षण सामग्री किसानों के घरों के समीप उपलब्ध करवाई जाए। कहा कि पड़ोसी राज्यों से मधुमक्खियों के लगभग 20 हजार बक्से मंगवाए जा रहे हैं। गुजरात से 25 लाख वर्ग मीटर एंटी हेलनेट की मांग भी की गई है। 


जीवन रक्षक दवाओं की कोई कमी न हो



बैठक में जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह, मुख्य सचिव अनिल खाची, अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज कुमार एवं आरडी धीमान, प्रधान सचिव प्रबोध सक्सेना, सचिव डॉ. आरएन बत्ता एवं अमिताभ अवस्थी, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम की महाप्रबंधक मानसी सहाय ठाकुर, निदेशक आबिद हुसैन सादिक, जल शक्ति विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ आरके पुरी और बागवानी विभाग के निदेशक एमएम शर्मा मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने उद्योग विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि फार्मास्यूटिकल और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी औद्योगिक इकाइयां प्रभावी तरीके से कार्य करें। इस बात ध्यान रखने को भी कहा कि औद्योगिक इकाई प्रबंधन श्रमिकों को बिना विलंब वेतन दें। आवश्यक वस्तुओं के प्रसंस्करण अथवा उत्पादन में शामिल औद्योगिक इकाइयां उत्पादन शुरू करें। इससे श्रमिकों के पलायन की समस्या का समाधान होगा। जलशक्ति विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेयजल आपूर्ति योजनाओं का उचित रख-रखाव किया जाए। पेयजल की आपूर्ति सुचारु हो।